Hindi, Hindi-Urdu Poetry, Jazbaat, Poetry

जज़्बा

यूं जज़्बा ईमानदारी का रखना,
कभी अपनों से माफ़ी की गुज़ारिश,
तो कभी अपनों को माफ़ करने की तैयारी रखना,

नए दोस्त तो फिर भी मिल जाएंगे,
पुराने दोस्तों से भी वफादारी रखना,
यूं जज़्बा ईमानदारी का रखना,